मैं कवि नहीं हूँ!

मैं कवि नहीं हूँ! निराला जैसी कोई बात मुझमे कहाँ!

119 Posts

27419 comments

Nikhil


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

चीख!

Posted On: 14 Aug, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

कफनचोर

Posted On: 3 Jul, 2014  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

2 Comments

विचार!

Posted On: 5 Sep, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

654 Comments

स्मृतियाँ

Posted On: 2 Sep, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

3 Comments

हम तो लिखते हैं, लिखते ही जायेंगे

Posted On: 28 Aug, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

656 Comments

हम बेकार हो गए!

Posted On: 22 Aug, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

देखता हूँ सूरज कब उगता है?

Posted On: 17 Aug, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

647 Comments

इंसान बदल जाते हैं

Posted On: 13 Aug, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

176 Comments

बारिश, आह ये बारिश

Posted On: 11 Aug, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

4 Comments

जो  तेरी जवानी है, वो मेरी कहानी  है

Posted On: 2 Aug, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

173 Comments

Page 1 of 1212345»10...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

دوست عزیز سرور مدرن Û³ ساپورت نمیشه و لی خب شما باید مطمئن باشید که نت شما باز هست و کسی میتونه به شما وصل بشه ، حتما مثله اینه تست کنید تª™™ÂˆÃ˜ÂÂادÃÈن با ای پی و به صورت دستی از طریق کنسول داخل بازی به شما بتونن وصل بشند بعد سرور بزنید.

के द्वारा:

Если честно я запутался как лучшее поступить сказать себе нет и постараться не БА°ÑÑ‚Ãрб¼Â¸Ã‘€Ð¾Ð²Ãðть или как говорит Али: «ÃÂ•Ã‘Ð»Ð¸ ты подросток, то лучше умеренно, поскольку крайне много психических проблем могут быть вызваны резким воздержанием». Что делать ????

के द्वारा:

می‌گه:کافه نادری:دیکتاتوری دیکتاتوریه و کسی ازش انتظاری نداره، اما دموکراسی با اون هم ادکلن و کت و شلوار و اهن و تلپ اوضاعش فرق می‌کنه. این موضوع اتفاقا خیلی هم به دموکراسی‌های واقعا موجود و سیستم‌هایی که دموکراسی هستن اما اساسا «به صورت دموکراسی کار نمی‌کنن» و به Ùˆ™ÂÃلیnot-functioning-democraciesمرØ‚¨Ã™ÂˆÃ˜Â· می‌شه.

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

के द्वारा: शिवेष सिंह राना शिवेष सिंह राना

के द्वारा: roshni roshni

के द्वारा: RAJEEV KUMAR JHA RAJEEV KUMAR JHA

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

यूं तो हर शाम उम्मीदों में ग़ुज़र जाती थी, आज कुछ बात है, जो शाम पे रोना आया … ऐ मोहब्बत तेरे अन्जाम पे रोना आया … ! (मरहूमा बेग़म अख्तर) मोहब्बत को सुपुर्दे खाक़ करने के बाद शायरी का जो जज़्बा दिल से फ़ूटता है, उसे कोई दिलजला ही बेहतर समझ सकता है निखिल जी ! जो शायरी नहीं कर सकते, वे तुकबन्दियों से काम चलाते हैं, जैसे कि हम । लेकिन जिन्हें खुदा ने इस इल्म से नवाज़ा है, वे आप ही की तरह ज़माने को ज़ार-ज़ार रोने पर विवश कर देते हैं । आशिक़ों के रुदन का मौसम चल रहा है, इसलिये एक से एक शेर, ग़ज़लें और रुबाइयों से हमें भी रूबरू होने का भरपूर मौक़ा हासिल हो रहा है । और उधर बेमौसमी बरसात अलग आग में घी डाल-डाल कर तड़पाए जा रही है - 'इधर रो रही हैं ये आंखें, उधर आसमां रो रहा है । मुझे कर के बर्बाद ज़ालिम, पशेमान अब हो रहा है । ये बरखा कभी, तो रुक जाएगी, रुकेंगे ना आंसू हमारे… वो देखो जला घर किसी का … !' आभार ।

के द्वारा:

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

इस तबके की आंखों में आंसू बचे ही कहां होते हैं निखिल जी, जो झरेंगे । कोई दया कर फ़ेंक न दे तो चीथड़े भी शेष न रहें । अब तो लोगों के अन्दर की दया भी सूखती जा रही है । क्या करें ? कल का खाता कमाता आज का भिखारी है । जो आज खा कमा रहा है, वह भिखारी बनने की लाइन में है । महंगाई गरीबी को बड़ी तेज़ी से दरिद्रता में तब्दील करती जा रही है । दूसरी तरफ़ वह तबका है, जो कल सड़क पर चप्पलें चटकाता था, लेकिन किसी की कृपा से आज बेशकीमती गाड़ियों पर सर्र सर्र उड़ रहा है । उसे आज चीज़ों के दाम से कोई मतलब नहीं, किसी भी कीमत पर उपभोग कर पाने में सक्षम है । दोनों तबकों के बीच की खाई बढ़ती जा रही है । यही असंतोष आज भीड़ की शक्ल में सड़कों पर है । देखें हमारे जनगणमन अधिनायक की क्या सूरत बन पाती है । साधुवाद ।

के द्वारा:

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा:

के द्वारा: Nikhil Nikhil

शिक्षा कों ढाल बना कर अपनी ही संस्कृति पर लिखे चुटकुले में मजे लेता भारत हर जगह आम है. कहीं बंदूकों कि आवाज़ और बम के धमाकों ने तेरे बच्चों के सुनने कि शक्ति छीन ली. अब तो डर और आतंक के साये में जीने कि आदत हो गयी है तेरे बच्चों कों.हमसे कहा जाता है हम वीर हैं, हम दुखों का सामना दिलेरी से करते हैं. कौन केहता है, हम दिलेर हैं. भय के साये में जीने वाले बच्चे दिलेर नहीं हुआ करते. हम रोटी कि मज़बूरी के तले दबे हुए मजबूर लोग हैं. नेताओं के आलिशान कोठियों से वादों के सैलाब में बहता भारत. कभी प्रिय श्री निखिल जी ये यक्ष प्रश्न अंतर्मन की पीड़ा से उपजे है | इनका उत्तर हर देश भक्त भारतीय चाहता है | जय भारत |

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: संदीप कौशिक संदीप कौशिक

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

प्रिय निखिल भाई ...नमस्कार ! मेरे लिए आपके लिए समय निकलना कोई एहसान नहीं बल्कि मेरा फ़र्ज़ है ..... लेकिन एक बा जो मन को सालती रहती है की मैं मानता हूँ की मैंने आप पर वयंग्य लिखा था जिसकी की आपको सपने में भी मुझसे उम्मीद नहीं थी , जिसका की मुझे हार्दिक खेद है ..... आपके किसी लेख पर तो मैं जानबुझकर ही टिप्पणी नहीं करता हूँ .... क्योंकि अतीत में अनेको बार ऐसा हुआ है की मेरे कमेन्ट के जवाब तक आते आते आप गायब हो जाते हो .... इसलिए बाकि के ब्लोगरो के हितार्थ ही मैं आपकी रचनाओं पर चाहते हुए भी अपनी प्रतिकिर्या नहीं दे पाता .... आप तो जानते ही है की मैं स्पष्टवादी हूँ इसलिए आज आपसे आपने दिल की बात कह दी .... धनुवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

आदरणीय शाही जी ......सादर प्रणाम ! प्रिय निखिल भाई .......नमस्कार ! दरअसल आदरणीय शाही जी भी अपनी जगह पर ठीक है ...... हमारे पंजाब में एक पनघुड़ा स्कीम चली है ,जिसमे कि मल्होत्रा अंकल (खिड़की के कांच छक्के मारकर तोड़ने वाले ) के बच्चे चुपके से डाल दिए जाते है ..... मैं तो बस उस खुदा का इक नेक बन्दा हूँ जोकि उन नाजायज बच्चों का उनके नाजायज माँ बाप से मेल करवा कर उनको नाजायज से जायज में बदलवाता हूँ .... ऐसा लगता है कि शाही जी पर मेरे किसी पुराने लेख का असर अभी भी बाकी है,उसको समझते हुए ही मैंने पिछली बाते याद करने कि कोशिश कि है ...... आप दोनों के मुझ पर जताए गए भरौसे के लिए + इस कद्र इज्जत मान देने के लिए आपका दिल कि गहराइयों से आभारी हूँ ...... वैसे आदरणीय शाही जी को मैंने कोमल नेगी जी के ब्लाग पर भी कुछ कहना था ,लेकिन वोह उचित जगह नहीं थी ,इसलिए यहाँ पर कहता हूँ ..... उनमे से छह आंटिया से तो मेरे नवीनतम लेख में ही आपका परिचय हुआ है .... धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

निखिल जी, यदि मुझसे पूछें तो मैं कन्डोम को बेकार की चीज़ ही कहूंगा । अक्सर इसके इस्तेमाल में असावधानियों के कारण इस्तेमाल के बावज़ूद गर्भधारण की शिकायतें आती हैं । पश्चिमी देशों में व्यभिचार को सामाजिक मान्यता प्राप्त होने के कारण असुरक्षित यौन सम्बंध ही अधिक स्थापित होते हैं, अत: उसी मात्रा में नाजायज संतान सहित यौन रोगों की सम्भावनाएं भी बनती हैं । वहां कन्डोम आवश्यक है, हमारे यहां इसकी कोई ज़रूरत नहीं है । लेकिन अनेक प्रकार के राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक षड्यंत्रों के तहत इसे सरकारी स्तर पर भारत के ऊपर थोप दिया गया है, और अकारण ही अपसंस्कृति फ़ैलाने का माध्यम बना हुआ है । इसका मर्दानगी से कोई लेना देना नहीं । साधुवाद ।

के द्वारा:

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

के द्वारा: