मैं कवि नहीं हूँ!

मैं कवि नहीं हूँ! निराला जैसी कोई बात मुझमे कहाँ!

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हमें हमारा हक़ चाहिए,(नौसिखुआ लेखक वर्ग, जागरण जंक्शन)!(हास्य)

Posted On: 24 Jun, 2010 Others में

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वैसे तो हमें इस मंच के बड़े-बड़े लेखकों की तरह लिखना नहीं आता. और हमें एक बात का बड़ा खेद है, चर्चा में आने के तौर-तरीके हमारे मंगनू मास्टर साहब ने हमें कभी नहीं सिखाया. मास्टर साहब ने बस इतना ही कहा था की मन से लिखना. तुम ठीक-ठाक लिख लेते हो. लिखते लिखते सिख जाओगे. तो मास्टर साहब कहे अनुसार हम लिखने लगे. लेकिन हुआ क्या. वहीँ के वही हैं हम. अब तो लोग पढ़ते भी नहीं. रोज आते हैं अपनी लेखनी को खुद ही पढ़ कर चले जाते हैं. वैसे एक बात याद आई, अभी कुछ दिनों पहले हमारे एक लेख आज की आधुनिक सीता पर दो बार प्रहार हुआ. अब इसे संयोग ही कहेंगे की दोनों प्रहार महिलाओं ने ही किया. उन्हें प्रहार करने को किसने कहा, चलिए छोडिये.
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वैसे मेरा इस ब्लॉग को लिखने का एक कारन ये है की में संपादक जी से नम्र निवेदन करना चाहता हूँ की श्रीमान हमारे जैसे टूटपुन्जिये लेखकों के लिए एक अलग स्थान तैयार किया जाये. अब इतने बड़े-बड़े लेखकों के बीच में हम नौसिखुओं को रखियेगा तो हमें पड़ेगा कौन. और कोई पढ़ेगा नहीं तो क्या हम अपना लेख अपने सर पर लाड के घूमेंगे. वैसे भी गर्मी में हमारा वजन थोडा कम हो गया. आजकल अपना वजन तो संभालता नहीं हम अपने शब्दों का भर कैसे धोयेंगे. अपनी इस शारिरीक कमजोरी की वजह से हमने आपसे थोड़ी सी जगह किराये पर ली है. लेकिन आप हम नौसिखुओं की सुनते कहाँ हैं.
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सबसे पहले तो आप ब्लॉगस्टार की घोषणा करें, ताकि ये पता चल जाये की ब्लॉगस्टार कौन है, अदितिजी, allrounder भाई, अंकलजी, भाईजी, गर्ग मैडम या टी२० की लिस्ट के अन्य प्रतिभागी. उसके बाद हमारे जैसे नौसिखुओं के लिए आप अपने होमपेज पर नौसिखुआ ब्लॉग करके एक नया टैब बनाएं. जिससे लोग सीधा हमारे पास पहुँच सकें. कई बार लोग ब्लॉगस्टार की खोज में हमारे ब्लोग्स पढ़ जाते हैं और हम कमेन्ट से वंचित रह जाते हैं. अब हमारा नौसिखुआ टैब होगा तो पढ़ने वालों को ये तो पता होगा की वो नौसिखुओं को पढ़ रहे हैं. तो हमारा प्रोत्साहन दुगुना हो जाएगा.
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वरना हमारा तो बंटाधार ही समझिये, बड़े-बड़े साहित्यकारों के बीच से हमें निकल कर हमें हमारा हक़ दें. वरना आपको तो पता है, अपने देश में काम कम हड़ताल जायदा होता. वैसे आपको एक अन्दर की बात बता दें, कई ऐसे नौसिखुए हैं जो मेरी तरह परेशान हैं. मैं सबको साथ में लेकर आमरण अनशन पर चला जाऊंगा. फिर तो आपको हमारी मांगें पूरी करनी होंगी…..
एक और सुझाव, इतनी बड़ी वेबसाइट बनायीं आपने लेकिन एक चीज़ में आप भूल कर गए….. मैंने बहुत से वेबसाइट पर एक व्यवस्था देखि है. आप उसका कंटेंट कॉपी नहीं कर सकते. आप तो ज्यादा जानते हैं, या यूँ कहें की उन साइटों पर राइट क्लिक काम नहीं करता…. ऐसा ही कुछ प्रावधान यहाँ भी हो जाता तो हमारे लेखकों की लेखनी की जो चोरी हुई है वो नहीं होती… आप से मेरा ये रिक्वेस्ट है की आप ऐसा ही कोई टेक्निक अपने वेबसाइट पर भी लायें. आप से ये नम्र निवेदन उग्र होकर हड़ताल तक जा सकता है, इसलिए हम नौसिखुओं की बात को मानते हुए हमें हमारा ब्लॉग स्टार प्रदान करें साथ ही हमें हमारा अधिकार भी दिया जाए… हमारा अलग स्थान……

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897 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Eel के द्वारा
May 24, 2011

Good point. I hadn’t tghouht about it quite that way. :)

Nikhil के द्वारा
June 26, 2010

मिस्ग्राजी मैं तो आज से अनशन पर जा रहा हूँ, अब तो रिजल्ट के बाद ही आऊंगा. अप समाचार हमारे मित्रों तक पहुंचा दें.

    Tyanne के द्वारा
    July 12, 2016

    And I was just wondireng about that too!

kmmishra के द्वारा
June 24, 2010

ऐ भाई अब नौसिखिया नहीं रहे तुम । बड़ो बड़ों का बल्ब् फ्यूज कर देते हो । और ब्लागस्टार प्रतियोगिता के बारे में लग रहा है आप सबका कुछ भ्रम हो गया है । यह प्रतियोगिता 15 जून 2011 तक के लिये है, 15 जून 2010 तक के लिये नहीं । बाकी अनशन वनशन मत करो फिर ब्लागिंग कौन करेगा ।

    Nikhil के द्वारा
    June 25, 2010

    हे भगवन, मुझसे इतनी बड़ी गलती. मेरी आँखें खोलने के लिए धन्यवाद मिर्श्राजी. मैं तो काम धंधा छोड़ के अनशन पे जाने वाला था.. प्रतिक्रिया के लिए आभार.

sumityadav के द्वारा
June 24, 2010

बहुत बढ़िया लिखा है निखिल जी। बधाई। वैसे आप खुद को नौसिखिया बोल-बोलकर एक के बाद धांसू लेखों की फायरिंग करते रहते हैं। अब तो आप नौसिखिया वर्ग से बाहर आ चुके हैं। हां लेकिन ये मुद्दा अच्छा उठाया आपने। हमारी मांगें पूरी करो। नौसिखिया लेखक वर्ग, जागरण जंक्शन जागृत हो। 

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद सुमितजी आईये एक आवाज़ में बोले… नवसिखुआ लेखक वर्ग जिंदाबाद!

    Jaylon के द्वारा
    July 12, 2016

    An extra issue can be that games can be serious since the name indicated most abundant in important target learning in lieu of amusement. Although, it comes with an enntneaitmert part to hold the kids engaged, each game will likely be designed to function towards a particular skill established or location, such while instructional mathematics or technology. Thanks for ones article.

subodh kant misra के द्वारा
June 24, 2010

निखिल जी अभिवादन, मै भी आपके साथ हूँ आमरण अनशन पर कब चलना है बताइयेगा

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    अस्न्हन तो मैंने शुरू करदी है, देखते हैं जागरण वाले मेरी बात मानते हैं या नहीं.. आपका स्वागत है अनशन मैं. नौसिखुआ लेखक वर्ग जिंदाबाद!

razia mirza के द्वारा
June 24, 2010

भाई मज़ा आ गया ये लेख पढकर। नंबर तो आप ही ले जायेंगे !! मिठाई तैयार रखो हम आ रहे हैं।

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    रज़िया दीदी, हमने तो मिठाई १६ को ही ऑर्डर कर दी थी, शुकर हो उस मिठाईवाले का, तब का ऑर्डर दिया आज तक नहीं आया.. लगता है उसे भी खबर है हमारे मंच की… प्रतिक्रिया के लिए आभार.

    Finch के द्वारा
    May 24, 2011

    Wow! That’s a really neat asnwer!

    Julz के द्वारा
    July 12, 2016

    McCain sounds like he is breathing out and not breathing in. This happens when people are under pressure to perform in front of audiences, or trying not to let their breath sounds be heard in the mieonphroc. It happened to me recently when I was dubbing a little video I made. Just my thought.

allrounder के द्वारा
June 24, 2010

यार निखिल तुम्हारे लेख मैं तुमने एक बात सही उठाई blog star pratiyogita का परिणाम क्यों नहीं आ रहा ? और यार तुम हड़ताल – पर नहीं जाओ ! बरना एक दिन मैं ३ लेख कौन लिखेगा यार ! jagranjunction की तो दुकान बंद हो जाएगी यार ! तुम jagranjunction के रामगोपाल वर्मा हो यार ! इतनी सारी फ़िल्में एक साथ रामगोपाल वर्मा और इतने सारे लेख एक साथ निखिल ही दे सकता है ! अच्छा लेख लिखने के लिए बधाई !

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    यार allrounder भाई, कहाँ थे आप इतने दिन से. कमबख्त आपको बहुत मिस किया. वो क्या है की, राम्गोपल्जी की आग देख के ही मैं उनका प्रशंशक बन गया था, एक आग हमने भी बनायीं, जो हँसना उन्होंने शुरू करवाया आज तक हंस-हंस के लिख रहा हूँ…

Ashutosh "Ambar" के द्वारा
June 24, 2010

निखिल जी आपने भी क्या बात कही है / कौन कहता है की आप अच्छा नहिओ लिखतें है ? भाई निखिल कुछ भी कहो हम तो आपके ब्लोग्स के दीवाने हैं

Ashutosh "Ambar" के द्वारा
June 24, 2010

निखिल जी बहुत खूब कहा आपने भी / कौन कह रहा है की आपको लिखने नहीं आता है /भाई कुछ भी कहो हम तो आपके ब्लोग्स के दीवाने है

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    अह्सुतोश जी आपने इतना बड़ा सम्मान दे दिया की शब्द ही नहीं मिल रहे… आभार, निखिल झा

    Jaundalynn के द्वारा
    May 24, 2011

    Never seen a betetr post! ICOCBW

R K KHURANA के द्वारा
June 24, 2010

प्रिय निखिल जी, जिस पेड़ को फल लगते है वो हमेशा ही झुक जाता है ! और नम्रता संतो का गहना होता है ! किसी ने कहा है न – जिनमें हो जाता है अंदाज़े खुदाई पैदा, हमने देखा है वो बुत तोड़ दिए जाते है ! तो अपने आप को छोटा कहना ही आपकी महानता है ! लगे रहिये इश्वर अवश्व सफल करेंगे ! मेरा आशीर्वाद आपके ;साथ है ! राम कृष्ण खुराना

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    अकंल जी अभी-अभी मैंने एक मजाक लिखा है. पढ़ कर जरुर प्रतिक्रिया दें… कल माहौल को हंसी के फवारों से सींचने की मेरी पहल पर आपकी प्रतिकिर्या की प्रतीक्षा रहेगी… आभार, निखिल झा

aditi kailash के द्वारा
June 24, 2010

क्या बात है निखिल भाई….आपको लगता है की आपको कोई पढता नहीं हैं, पढ़ते तो सभी हैं पर कमेन्ट देने में कंजूसी कर जाते हैं (हम नहीं है उनमें, पर क्या करें ये कमबख्त ph d हमें आजकल ज्यादा नेट का दुरूपयोग करने नहीं दे रही है )…. अभी तक कांटेस्ट का रिजल्ट नहीं आया ना, तो डरते हैं कहीं बाज़ी आप ही ना ले जाओ…. वैसे आप भी उम्मीदवारों में हैं….अपने को कम मत आंकिये….बहुत ही अच्छा व्यंग्य लिखा है आपने…. आपने सुरक्षा के लिए जो सुझाव दिए वो बहुत ही अच्छे हैं पर हमें लगता है यहाँ पर बैठे-बैठे हमारी कोई नहीं सुनेगा, तो हम सब को अलग-अलग जागरण टीम को इस बारे में लिखना चाहिए…..

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    अदितिजी भाई कह के आपने तो हमारा दिल जीत लिया. मैंने तो नौसिखुआ वर्ग की व्यथा रखी है. पी.एच.डी, बाप रे, आप तो बहुत पढ़ी लिखी हैं, थोडा सा ज्ञान हमें भी दे दीजिये. मैं आपकी बात नहीं कर रहा, यहाँ इस ब्लॉगस्टार के चक्कर में लोग कमेन्ट में कंजूसी कर जाते हैं. अरे भाई, जब तक लिखने वाले को उसकी गलतियाँ नहीं बताइयेगा वो अच्छा कैसे लिखेगा. बस इसी बात का हमें खेद है.

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    अदिति बहिन अनशन केलिए यहाँ आइये और हमारे साथ एक आवाज़ मैं बोलिए… हमारी मांगे पूरी करो…

    Marylada के द्वारा
    July 12, 2016

    OH! How could I have forgotten, Joe the Plumber is a Christian, that was very clear..and an unashamed one! (get a net and capture him for study!) (smile)Lynda’s right…pray for God to heal this la&83#d2n0;…make him sovereign again!

chaatak के द्वारा
June 24, 2010

निखिल जी, आपकी मांग (बाल वाली नहीं रे बाबा हक़ वाली) बिलकुल जायज है | हम आपके साथ हैं (मतबल यो के आगे चलो हम माहोल देख के बाद में पीछे से आते हैं.)| हो सकता है उग्र(वादी नहीं रे बाबा) आन्दोलन करना ही पड़े | अगली पोस्ट (डाक नहीं रे बाबा लेख) में झंडा, धरने का स्थान और नारा (बाँधने वाला नहीं रे बाबा, बोलने वाला ‘गणपति बाप्पा मौर्या के माफिक’) आदि सामग्री के बारे में भी लिखियेगा | अच्छी पोस्ट के लिए बधाई | मज़ा आ गया |

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    चाताक्जी, जय हो गुरु(देव वाला नhin मणिरत्नम वाला), आपके इस प्रतिक्रिया से एक और मुद्दा(संसद वाला नहीं जागरण वाला) मिल गया. आपके आशीर्वाद(पिता वाला नहीं मित्र वाला), से अभी कुछ ही देर मैं प्रस्तुत करने की कोशिश करूँगा. अगर लाइन(लड़कियों को मरने वाला नहीं, बल्ब जलने वाला) रहा. आभार, निखिल झा

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    क्या जवाब है चातक जी, मजा आ गया पढ़कर……..

    chaatak के द्वारा
    June 24, 2010

    शुक्रिया अदिति जी, निखिल जी तो फिर से व्यस्त हो गए | जब तक ये लिखें मैं एक झपकी मार लेता हूँ | जागने के बाद कमेन्ट मारना पड़ेगा न |

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    क्या बात है चातक जी, लगता है आपके कॉलेज की छुट्टियाँ चल रहीं हैं आजकल….तभी आप झपकियाँ लेने की बात कर रहे हैं….

    Bella के द्वारा
    May 24, 2011

    IJWTS wow! Why can’t I think of tihngs like that?


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