मैं कवि नहीं हूँ!

मैं कवि नहीं हूँ! निराला जैसी कोई बात मुझमे कहाँ!

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मैं तेरी ही तो आवाज़ हूँ!

Posted On: 10 Jul, 2010 Others में

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मैं हर ह्रदय का गीत हूँ, मैं भंवरों का संगीत हूँ,

मैं हूँ लहर समुद्र का, मैं ही तो मीरा की प्रीत हूँ.

कर्त्तव्य हूँ मैं पुत्र का, मैं शूरता का प्रतीक हूँ,

डरता नहीं जो मृत्यु से, मैं शूरवीर, निर्भीक हूँ.

मैं कर्ण का निःस्वार्थ त्याग हूँ, मैं ही तो सुरों का राग हूँ,

मैं वेदना हूँ विरह की, मैं ही तो सूर्य का आग हूँ.

मैं हिन्दू हूँ, मैं ही तो मुसलमान हूँ,

मैं धर्म हूँ, मैं जाती हूँ, मैं ही तो पुरषों का अभिमान हूँ.

मैं प्रेम हूँ, करुणा भी मैं, मैं ही तो स्त्रियों का सम्मान हूँ

तुझमें छिपा जो बरसों से , उस क्रांति का, मैं ही तो आह्वान हूँ.

कब तक यूँही परिचय मेरा, तेरी समझ न आएगा,

कब तक रहेगा बेखबर, कब तक यूँही पछतायेगा.

अब तो तू पहचान जा, अब तो तू ये मान जा,

कानों को तेरी झंक्झोरती, मैं तेरी ही तो आवाज़ हूँ.

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1335 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kaylan के द्वारा
May 24, 2011

Tnhaks for the insight. It brings light into the dark!

    Latrice के द्वारा
    July 12, 2016

    The abtiliy to think like that shows you’re an expert

Nikhil के द्वारा
July 13, 2010

कविता पसंद करने के लिए आपका आभार आशुतोष जी.

Ashutosh "Ambar" के द्वारा
July 13, 2010

वाह निखिल जी वाह !!!! क्या बात है बहुत ही सुन्दर रचना /// मैं वेदना हूँ विरह की, मैं ही तो सूर्य का आग हूँ. मैं हिन्दू हूँ, मैं ही तो मुसलमान हूँ, मैं धर्म हूँ, मैं जाती हूँ, मैं ही तो पुरषों का अभिमान हूँ. मैं प्रेम हूँ, करुणा भी मैं, मैं ही तो स्त्रियों का सम्मान ह………………………………सुन्दर पंक्तियाँ

    Heaven के द्वारा
    July 12, 2016

    We still cannot quite think that I may come to be a type checking important points situated on yuor web blog. My loved ones i are sincerely thankful for use in your generosity plus giving me poibisilsty pursue our chosen profession path. Published right information I purchased out of your web-site.

Raj के द्वारा
July 12, 2010

अब तो तू पहचान जा, अब तो तू ये मान जा । अब हम आप को पहचानने लगे हैं निखिल जी, क्योंकि आप धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं ।

    Nikhil के द्वारा
    July 12, 2010

    चलिए आखिर आपने हमें पहचाना तो. राज जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

Tufail A. Siddequi के द्वारा
July 12, 2010

निखिल जी अभिवादन, “आप कवि नहीं है ! आपमें निराला जैसी कोई बात कहाँ !” लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा लगता की …………………………………………………..”

    Nikhil के द्वारा
    July 12, 2010

    सिद्दीकी जी प्रतिक्रिया के लिए आभार. आपकी प्रतिक्रिया बहुत कुछ कह गयी. धन्यवाद.

    Tess के द्वारा
    July 12, 2016

    Just found an unifintedied object in our nest box. Looks similar to a large piece of ginger, and stinks to high heaven. DH pulled it apart with sticks and likened it to a piece of meat. All five hens appear healthy; no noticeable drop in production. Any ideas? My dad is visiting – your cousin BB – and suggested I ask you

rajkamal के द्वारा
July 11, 2010

me to kabb se chik-2 kar keh raha hu ki .. aapko khud hi pata nahi hai aap ‘kya-kya’ hai.. abhi aur bahut se andaz dekhne baki hai hamko …

    Nikhil के द्वारा
    July 11, 2010

    मैं भी तो कब से चीख-चीख कर कह रहा हूँ राज्कमल्जी, ये आपका ही समर्थन और प्यार है जो हमें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. आप यूँही प्यार देते रहे, प्यार के चार रंग के साथ अपने भी चार रंग दिखने की कोशिश करेंगे. आभार, निखिल झा

    Boston के द्वारा
    May 24, 2011

    What a joy to find smooene else who thinks this way.

Ramesh bajpai के द्वारा
July 11, 2010

मैं धर्म हूँ, मैं जाती हूँ, मैं ही तो पुरषों का अभिमान हूँ. मैं प्रेम हूँ, करुणा भी मैं, मैं ही तो स्त्रियों का सम्मान हूँ     बहुत ही खुबसूरत भाव अच्छी रचना निखिल जी बहुत बहुत बधाई

    Nikhil के द्वारा
    July 11, 2010

    रमेश जी, आप जैसे अनुभवी व्यक्ति की प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन से मैं धन्य हो गया. मेरी कविता को पसंद करने के लिए आपका धन्यवाद.

aditi kailash के द्वारा
July 10, 2010

बहुत ही सुन्दर कविता…

    Nikhil के द्वारा
    July 11, 2010

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद अदिति बहिन.

    Butch के द्वारा
    July 12, 2016

    hola carlos,me temo que vivo en madrid; antes iba más a menudo a bcn, pero ahora voy muy de vez en cuando . además no tengo ni la dirección ni el teléfono. y la galangal no siempre la tisutn.eneree y un saludo,

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
July 10, 2010

बहुत अच्छी कविता निखिल जी !!! जैसा की मैं ने आपकी कविता में महसूस किया …… आप यही कहना चाहते हैं की आप पहले अपने आप से शत – प्रतिशत सहमत और संतुष्ट हो जाए ……… आप अपना मूल्यांकन अपने ह्रदय से करवाएं जो इश्वर स्वरुप है ……. और अगर आप इस परीक्षा में शत पतिशत खरे उतरते हैं तो आप सबकुछ हैं ………………… मेरा इससे कतिपय ये आशय नहीं की आप अगर पूर्णरूपें सत्य और सन्मार्ग के अनुचर हैं तो आप अन्यो की अनदेखी करें………. क्योंकि? ईश्वर एकीकृत है…………. आप जिस किसी की अनुसंशा अथवा उपेक्षा भ्रम या संज्ञान में होकर करेंगे वो भी उसी का एक अंश होगा ! हाँ आप ये अवश्य करें की उसे भी उस परम शक्तिमान का अंश होने का विश्वाश दिलाएं और उसे भी सत्पथ का अनुगामी बनने का अवसर प्रदान करवाएं… …………………

    Nikhil के द्वारा
    July 11, 2010

    आपकी इस अनमोल प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद शैलेश जी. मैं बस इतना ही कहूँगा की मेरे एक-एक शब्द को आपने अपने शब्द मैं ढाल कर मेरी कविता की जो व्याख्या की, दिल को छू गयी. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. आभार, निखिल झा

    Cinderella के द्वारा
    July 12, 2016

    Ocgt1Geor1e Murphy Nick, That was good and I mean it. Not from Neb., but my best friend in the 70′s was a die hard Corn Husker fan. So we watched every game on T.V. and listened on the radio. I have been a fan for a long time, but the game with Ohio State, the second half made me sick, I hate Ohio St. and really wanted Neb. to win, cost me $10.00 but will never bet on them again,??? what happened???

anamika के द्वारा
July 10, 2010

बहुत सुन्दर रचना है…………….मन मोह लिया……………….शब्द व्यंजना अति सुन्दर

    Nikhil के द्वारा
    July 11, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद अनामिका जी. आपलोगों की प्रतिक्रिया का ही फल है की मैं अभी थोड़ी बहुत कवितायेँ लिख पा रहा हूँ, मेरी कविता मैं कवी नहीं हूँ भी अवश्य पढ़ें एवं अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवगत कराएं. आपका आभार. निखिल झा

chaatak के द्वारा
July 10, 2010

सुन्दर अभिव्यक्ति ! निखिल जी, आपकी कविता में जो भाव है ‘अहं ब्रह्मास्मि’ की और इशारा करता है | ऐसी ही एक कविता मैंने पिछले वर्ष लिखी थी और उसे पहेली के रूप में अपने सभी मित्रों को भेजा था | सिर्फ शब्दों का अंतर है भाव वही हैं | ये नया कलेवर भी बेहद पसंद आया| खूबसूरत संयोजन | बधाई !

    Nikhil के द्वारा
    July 10, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद चातक जी. मैं और आप अलग कहाँ हैं, बहुत समानता है हममे. आपकी इस प्रतिक्रिया ने एक बार और इस बात को सिद्ध कर दिया की, हमारी सोच एक दुसरे के बहुत समीप है. धन्यवाद.


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