मैं कवि नहीं हूँ!

मैं कवि नहीं हूँ! निराला जैसी कोई बात मुझमे कहाँ!

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मेरी स्याही आज स्याह होना चाहती है!

Posted On: 18 Aug, 2011 में

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notebook_and_penस्याही, स्याह है मेरी, हृदय श्वेत है,
स्याही समंदर है, और कागज़ मेरा रेत है
हर बार  लिखता हूँ, हर बार मिटाता हूँ
अपनी स्याही से मोहब्बत,मैं  निभाता हूँ

मेरी स्याही आज स्याह होना चाहती है,
इस नयी क्रांति का गवाह होना चाहती है,
लिखना चाहती है ये बदनाम गलियां
कुछ अनसुने किस्से और नादान कलियाँ,
रौशनी से भरी, लापरवाह वो दुनिया
और कोने में खड़ी बिलखती नन्ही मुनिया,

लिखना चाहती है वो गुमनाम किस्से,
कतरे हुए स्वप्न और हँसते हुए बच्चे,
कुछ कल का इतिहास और क्रांति कि बातें,
कुछ आज कि आधुनिकता और बेशर्म रातें,
कुछ मेरी मज़बूरी और रिश्तों का यथार्थ,
कुछ संगीन जुर्म और दानवी स्वार्थ

भिगोना चाहती है ये, हर सफ़ेद लिबास,
लिखना चाहती है ये, नवभारत का इतिहास,
राष्ट्र का गीत उकेरना चाहती है ये,
बेईमानी से मुँह फेरना चाहती है ये,
माँ कि ममता का करना है इसे एहसास,
प्रेम में डूबकर बुझाना चाहती है ये  प्यास

स्याही लाल है आज, कुरुक्षेत्र की तस्वीर बनाएगी,
लिखेगी दास्ताँ भारत की, नवचेतना लाएगी
भूख पर भिगोयिगी ये आँखें और हुंकार भरेगी
लोकतंत्र को डसने वाले राक्षसों से लड़ेगी,
मिटाएगी ये द्वेष हिंदुस्तान के ह्रदय से,
लाएगी नव-कहानी, प्रेम और विनय से,

मेरी स्याही की बात अब जग ये सुनेगा
मेरी स्याही के शब्दों को विश्व गुनेगा,
मेरी स्याही हर अंतर्मन में नाद भरेगी ,
मेरी स्याही हर क्षण सिंहनाद करेगी,
मेरी स्याही आज स्याह होना चाहती है,
इस नयी क्रांति का गवाह होना चाहती है,

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185 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manoranjanthakur के द्वारा
August 22, 2011

बहुत मनभावन रचना बधाई

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    मनोरंजन जी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया.

    Storm के द्वारा
    July 12, 2016

    jipe 7 août 2012 C’est marrant, mais tu parle de tolérance et ta photo de ramadan, tu la nommes « ramadan », ta photo de parachute, tu la nommes &l;;&o;&nbspqparachute uraquoa, ta photo de requin, tu la nommes « requin », ta photo d’homme, tu la nommes « idiot », je te trouves carrément tolérant pour les types qui ont le faciès « ingrat… :-)

rahulpriyadarshi के द्वारा
August 19, 2011

बहुत खूब,उत्तम….आपकी स्याही सिर्फ स्याह ही नहीं होगी….विविध रंगों से आप चमन को रंग डालेंगे,यह भरोसा है आपकी लेखनी पर…लाजवाब :)

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    आपको रचना पसंद आई मेरा परिश्रम सफल रहा.

    China के द्वारा
    July 12, 2016

    , sérieux je me le demande aussi ses une excellente question !J’ai l&;ieuorimprqssson que sa doit pas aller super bien au niveaux des ventes de e-book hehe Faut croire que le monde sont moins naif qu’on le pense hehe

abodhbaalak के द्वारा
August 19, 2011

इस विषय पर वाहिद जी के साथ हूँ, उतना ही मेरी और से भी :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    आपका आभार अबोध जी.

    Doughboy के द्वारा
    July 12, 2016

    Begun, the great internet eduiotcan has.

Alka Gupta के द्वारा
August 18, 2011

चित्रकार की तूलिका ने भर दिए रंग श्वेत हृदय पर स्व स्याही से अखिल अंतर्मन से हुंकारता सिंहनाद कौन है वह चित्रकार कौन है ?अरे ,वही तो है शिल्पकार अखिल ! जज़्बे को सलाम !!!

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए आभार अलका जी.

Santosh Kumar के द्वारा
August 18, 2011

निखिल जी ,.आपके जज्बे को दंडवत प्रणाम ,…यही जज्बा हर एक भारतीय युवा का होना चाहिए …कोटिशः धन्यवाद

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    प्रिय संतोष जी, आपकी बहुल्मुल्या प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन के लिए आभार.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 18, 2011

5/5 आपकी इस अतिसुन्दर रचना के लिए.. रेटिंग कर दी है|

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    वाहिद भाई, आपकी प्रतिक्रिया पाकर मन हर्षित हो गया. आपके प्रोत्साहन के लिए आभार.

    Cheyenne के द्वारा
    July 12, 2016

    verry nice live streaming;) but i want to become a partner and i want do do a lot of live streaming about The art of displacement (pnkrour&freeruaninf) tutorials about tricks ;)

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 18, 2011

निखिल भाई, क्या जज़्बा दिखाया है आपकी स्याही ने। आपकी भावनाओं की स्याही और हृदय के पृष्ठों ने मिलकर ऐसी अनोखी रचना रची जो बहुसंख्य देशवासियों की भावनाओं का सजीव वर्णन करती है। पूर्ण विश्वास है मुझे कि आपकी स्याही के साथ हम सब भी इस नयी क्रांति के गवाह बनेंगे। वंदे मातरम..

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    पुनः आभार.

nishamittal के द्वारा
August 18, 2011

कविता के रूप में में देश के प्रति देश के प्रति आपके स्वप्न साकार हों.ऐसी शुभकामनाये.

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    आदरणीय निशा जी, आपलोगों का आशी र्वाद यूँही मिलता रहे तो बस ये सफ़र ज्यादा लम्बा नहीं खींचेगा.

संदीप कौशिक के द्वारा
August 18, 2011

भगवान आपको ऐसा करने के लिए यथा-संभव मनोबल प्रदान करें । आज भारत का हर जागरूक युवा ख़ुद से यही अपेक्षा कर रहा है । बहुत खूब निखिल भाई !! :)

    Nikhil के द्वारा
    August 22, 2011

    प्रिय संदीप भाई, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार.

Nikhil के द्वारा
August 18, 2011

ही


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