मैं कवि नहीं हूँ!

मैं कवि नहीं हूँ! निराला जैसी कोई बात मुझमे कहाँ!

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एक आम आदमी हूँ मैं!

Posted On: 9 Feb, 2012 Others में

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एक आम आदमी हूँ मैं
कभी गिरता हुआ, कभी संभलता हुआ
कभी चलता हुआ, कभी रुकता हुआ
कभी रोते, कभी गाते
कभी ग़मों को गुनगुनाते
सड़क से गुजरता हुआ
गलियों से चलकर
संघर्ष से छनकर
कदम दर कदम
अपनी रोजी-रोटी की तलाश में
कभी गाँव, कभी शहर
कभी नगर, कभी महानगर
की ख़ाक छानकर सुकून के दो वात्क्त के जुगाड़ में
कभी महलों के दरवाजों पर
कभी राजपथ के मंदिरों के
बाहर दस्तक देता
एक आम आदमी हूँ मैं
कभी चौराहे पर
कभी बाज़ार में
खुद की बोली लगाने वाला
कभी हालत का मारा हुआ
कभी समय से हारा हुआ
कभी महंगाई के बोझ तले पिसता हुआ
कभी अपने नसीब को पथ्थरों पर घिसता हुआ
धुप के ताप से बचने के लिए
एक अदद आशियाने की तलाश में
इस घर से, उस घर के
चक्कर लगाने वाला
एक आम आदमी हूँ मैं
कभी रोटी के लिए
कभी छोटी के लिए
कभी बगावत के लिए
कभी चाहत के लिए
कभी माँ की दवाई के लिए
कभी बहिन की विदाई के लिए
कभी मिलों में
कभी मंत्रियों के किलों में
अपनी ईमानदारी के पोछे से
बाबुओं के लहू की प्यास उझाने वाला
एक आम आदमी हूँ मैं!

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1361 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Tufail A. Siddequi के द्वारा
April 20, 2012

निखिल जी सादर अभिवादन, आपने आम आदमी के दर्द को शब्दों में बखूबी पिरोया है. कवि की शायद यही खूबी होती है. बधाई. http://siddequi.jagranjunction.com

abhishektripathi के द्वारा
February 14, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

chaatak के द्वारा
February 11, 2012

प्रिय निखिल जी, आम आदमी के दर्द को बयान करती ये रचना वाकई लाजवाब है सरकारी मशीनरी में पिसते हुए आम आदमी की व्यथा को शब्द देने के लिए आपका धन्यवाद! अच्छी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई!

dineshaastik के द्वारा
February 11, 2012

निखिल जी नमस्कार. आम आदमी की सटीक प्रस्तुति के लिये बधाई… लेकिन फिलहाल चुनावी मौसम में वही आम आदमी खास बन गया है। कृपया मेरी “बहस” को देखकर अपने विचार व्यक्त करें। http://dineshaastik.jagranjunction.com/

shashibhushan1959 के द्वारा
February 10, 2012

आदरणीय निखिल जी, सादर ! सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति ! बधाई !

krishnashri के द्वारा
February 10, 2012

महोदय , बहुत सुन्दर ,भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई .

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 10, 2012

एक आम हिन्दुस्तानी के जीवन का वृत्तान्त प्रस्तुत कर दिया आपने अपनी कविता के माध्यम से।  बहुत ही बढ़िया निखिल जी।

आर.एन. शाही के द्वारा
February 10, 2012

एक आम आदमी की बिल्कुल सही तस्वीर प्रस्तुत की निखिल जी । बधाई ।

    Karess के द्वारा
    July 12, 2016

    Keep on writing and chingugg away!

yogi sarswat के द्वारा
February 10, 2012

आम आदमी का सजीव वर्णन करती काव्यात्मक प्रस्तुति , बहुत सुन्दर निखिल जी ! आपका समय और विचार चाहता hoon ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/

vikaskumar के द्वारा
February 10, 2012

एक आम आदमी की पीड़ा को गहराई से महसूस कर आपने एक भावपूर्ण कविता लिखी है ।

    Jaylyn के द्वारा
    July 12, 2016

    Yo, good loiokn out! Gonna make it work now.

div81 के द्वारा
February 10, 2012

एक आप आदमी की वेदना को बहुत भावपूर्ण तरीके से उकेरा आपने अपनी कविता में गम्भीर रचना पर आपको बहुत शुभकामनाये..

    Buck के द्वारा
    July 12, 2016

    I’m not quite sure how to say this; you made it exletmrey easy for me!

alkargupta1 के द्वारा
February 10, 2012

निखिल जी , एक आम आदमी के मन की व्यथा की अति भाव पूर्ण अभिव्यक्ति !

Rachna Varma के द्वारा
February 9, 2012

जी निखिल जी अपने आम आदमी की पीड़ा को जिस तरह से व्यक्त किया है वह सराहनीय है धन्यवाद

    Janelle के द्वारा
    July 12, 2016

    I wonder if the wheels of justice will ever turn toward the cooprutirn of JD Hayworth or Conrad Burns? ….. slow? I think the current regime has the legal “loop” wired to protect the insiders.


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